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हिन्द महासागर के मोती मारिसस आ भोजपुरी 

मारिसस मे भोजपुरी के स्थिति दिन प्रति दिन पातर होत जात बा , हमनी के एजुगा भारत मे बात बे-बात मारिसस त्रिनिदाद फिजी सरीनाम आदि के नाव लेनी जा की एजुगा भोजपुरी खुब चलत बा त हम बता

वल चाहब कि जतना जानकारी हमरा बा ओह हिसाब से त्रिनिदाद टोबैगो मे भोजपुरी बस गीत गवनई मे बाचल बिआ ठीक ओइसही फिजी के भी हाल बा , सरीनाम मे त भोजपुरी के रुप भाव लगभग बदला गइल बा आ एजुगो भोजपुरी गीत गवनई आ तनकी सा साहित्य मे बाचल बिआ , मारिसस जहवा से भोजपुरी हिंदी के साहित्यकारन के बेसी आवाजाही रहेला ओजुगा भोजपुरी आधा से बेसी खतम हो गईल बिआ . भोजपुरी की हिंदी एहि मे परि के भोजपुरी लगभग स्वाहा गइल बिआ , मारिसस मे भी भोजपुरी के तिजि के हिंदी प बेसी ध्यान देता एकरा बादो एजुगा सबसे बेसी क्रियोल (बोलचाल खाति ) ओकरा बाद लिखाई पढाई मे फ्रेंच आ अंग्रेजी के विशेष स्थान बा । जइसे भारत मे हिंदी के पत्रिका मे एक दु पाना भोजपुरी के मिल जाला ओहिंग मारिसस मे कबो कबो हिंदी पत्रिका मे भोजपुरी के तनकी सा जगहि भेटा जाला बाकि भोजपुरी कुछ घरन मे अबहियो बोलचाल के भाषा बनल बिआ ।

भारत मे हई जवन मारिसस के सरीनाम त्रिनिदाद फिजी के बतकही चलेला असल मे ई कुल्हि लोग भाव टांठ करे खाति बतियावेला , हँ ई सही बा की एह कुल्हि देसन मे भोजपुरिया संस्कार संस्कृति अबहियो बाचल बा बाकि जवना हिसाब से भाषा भोजपुरी एजुगा खतम हो तिया ओह आधार प इहे कहल जा सकत बा कि कहियो ना कहियो संस्कारो संस्कृति के असमय मउवत के केहु रोक नइखे सकत ।

कुछ दिन पहिले केहु हीरामन आईल रहले मारिसस आ उँहा के भोजपुरी के छोडला के बहुत नीमन कहले ( संतोष पटेल भाई के वाल से साभार ) आ इहे कुल्हि वजह बा कि क्रियोल ओजुगा हावी बिआ आ हिंदी त बस कहे खाति बिआ, भोजपुरी अबहियो कुछ घर मे बिआ बाकी आपन रुप आकार हाव भाव लगभग भुला गइल बिआ आ एह मे ओजुगा के लोगन के बेरुखी बडहन कारन बा ।

एह बात के अनुभव हमनी के डा. हेमराज सुंदर जी ( संपादक , भोजपुरी कविता संग्रह , मोका , महात्मा गांधी संस्थान , मारिसस ) एह क्षणिका मे कई सकेनी जा ।

भोजपुरी कविता सब कोय सुनलक

ना कोइ थपडी बजयलक

ना कोय देलक दाद !

बानदर का जानी भला

अदरक के स्वाद !!

महात्मा गांधी संस्थान मारिसस मे हिंदी आ भोजपुरी दुनो भाषा के प्रचार प्रसार खाति काम करत बा , तबो भोजपुरी भाषा के स्थिति मारिसस मे बहुत नीमन नइखे , भोजपुरी अबहियो लोकगीत चौताल आदि मे बिआ आ हमनी के पुरा विश्वास बा कि आगहु रही , बाकि जवना हिसाब से भारत मे लोगन के एह भाषा से मोह नेह घटत बा ओह के देखत हमनी के गिरमिटिया कहाये वाला अपना भाई देयाद गोतिया पटीदार से कतना के उमेद कई सकेनी जा ?

अभी ढेर डेग चले के बा आ चलल जरुरी बा , लग्गी से पानी पिआवे के रहन छोडि के लागे के परी , मारिसस मे भी कुछ लोग कहत बा आ डा. हेमराज सुंदर जी लिखले बानि की ...

चिन्वा बोले भोजपुरी

मौला बोले भोजपुरी

क्रिस्चन बोले भोजपुरी

हिन्दू बोले भोजपुरी

सब के सब बोले भोजपुरी

तू काहे नयs बोले लs भोजपुरी

तू कोन खेत के मूली ?

- नबीन कुमार

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आखर 

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