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भोजपुरी के एगो पाना

हमरा मन में तन में दिल आ दिमाग में जवन भी भोजपुरी प्रेम बा उ बस एहि एक पाना के वजह से ।


भोजपुरी भाषा और साहित्य के ई पन्ना जवना के शीर्षक " दो शब्द " ह ई कवनो दस्तावेज ना ह बलुक इहे ऊ पन्ना ह जवन हमरा के भोजपुरी भाषा के भाषा माने आ एह भाषा खाति कुछ नीमन करे के प्रेरित कईलस ।


एगो हिन्दी के स्कालर बी.ए. के छात्र , पढे लिखे मे नीमन , जब डा. ग्रियर्सन के ई कहल सुनलस कि " भोजपुरी भाषा , हिन्दी क्षेत्र के बाहर के भाषा ह " त खुन जरि गईल , आ ई छात्र इहे सोचलस कि अंग्रेजन के निती बा फूट डाले आ राज करे के । आ ग्रियर्सन के ई बात देशद्रोह लागल उदय जी के ।


बाकि लगातार २४ बरिस ले भोजपुरी के पढाई लिखाई शोध खोज कईला के बाद उदय नारायण तिवारी जी के बुझाईल कि भोजपुरी एगो अलग स्वतंत्र भाषा ह आ तब उदय जी के अपना पुर्वाग्रह प खेद भईल ।


उदय जी ग्रियर्सन , जबूल ब्लाख , टर्नर , सुनिति कुमार चटर्जी के बेरि के हवे ओह लोगन से छोट रहले सानिध्य मे रहले , इनिकर काफी निम्बंध लेख आ भोजपुरी भाषा खाति खोज के ई चारो जाना बहुत सरहले बा लो , एहि लो के दम बल प उदय जी लगातार भोजपुरी खाति लागले रहि गईनी । राहुल सांकृत्यायन जी के संगे इँहा के कई गो किताबिन के अनुवादो कईले बानी आ राहुल जी से इँहा के बहुते प्रभावित भी रहनी ।


असल मे होला का कि हमनी के भोजपुरी के बस गीत गवनई कविता ले बुझि के रहे देत बानी जा , बाकि जब एह लोगन के प्रयास के जाने सुने के मिलेला तब बुझाला भोजपुरी के भाषाई ताकत । एक जगहा उदय जी लिखत बानी की प्रयाग मे ( शायद १९७३ मे ) एगो सम्मेलन भईल रहे आ जगजीवन बाबू भी ओह मे आईल रहनी , माने अतना ना अलग अलग तरह के भोजपुरी के साहित्यिक रुप के चर्चा भईल जवना के कवनो ओरे छोर ना रहे आ दर्शक के आंखि कबो लोराउ त कबो चिहाउ त कबो ठठा के हंसे । माने मंच के संगे संगे दर्शक लो चलत रहे आ दर्शक बुद्धिजीवी पढल लिखल छात्र लो रहे आ मंच प खलिहा कवि आ साहित्यकार लो ।


एह फोटो के पोस्ट करे के मकसद इहे बा कि रउवा भोजपुरी के भाषा मानि के एगो सक्षम बरिआर भाषा मानि के चलत बानी त रउवा सही राहि प बानी ई सिद्ध कई चुकल चीझु ह ।

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आखर 

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