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भिखारी ठाकुर के आस्तिक रुप आ भक्ति भाव -1

भिखारी ठाकुर के आस्तिक रुप आ भक्ति भाव -1

भिखारी ठाकुर के रचना में साहित्य लालित्य दर्शन से ले के हर पहलू कूट कूट के भरल बा । हम जब कबीर के रहस्यवाद आ दर्शन से भिखारी के सामाजिक दर्शन आ बेवहार के तुलना करेनी त दूनो लोगन के ठेठ अंदाज हमरा के भोजपुरी के अंकवारी में लपेट लेला । असल में अइसन लोगन के रचना रउवा खातिर जिविकोपार्जन के कारण ना बाकि जिये के कारण बन सकेला जदि राउर मातृभाषा भोजपुरी होखे ।

हम अबहीं ले जतना किताब लेख भा पत्रिका उपन्यास हम भिखारी ठाकुर के बारे पढले बानी , हम इ देखले बानी कि भिखारी ठाकुर के आस्तिक भाव के चर्चा कहीं नइखे आ जदि बा त एकदम ना बुझाये लेखा । भिखारी ठाकुर जहाँ टंट ढंट जाति पाति प आपन बात आपन प्रतिरोध दर्ज कइले बा‌डे , बाकिर ओइसहीं भा ओतने उ आपन आस्तिकता देखवले बा‌डे । भगवान राम , पवनसुत हनुमना , गौरी , गनेस आदि में भिखारी ठाकुर के आस्तिक भाव ।

अइसे त भिखारी ठाकुर अपना हर नाटक के शुरुवात मंगलाचरण से कइले बा‌डे , क जगह संस्कृति के प्रचलित श्लोक के लिखले बा‌डे बावजुद एकरा उ भक्ति के रंग में आपन क गो रचना कइले बा‌डे ।

लोक-नाटक -

1- राधेश्याम बहार - कृष्ण प आधारित 2- गंगा स्नान - सामाजिक मुद्दा बाकिर गंगा स्नान आ मेला प आधारित

भजन-कीर्तन - एह में अलग अलग शीर्षक के नावे काव्य के रचना भिखारी ठाकुर कइले बा‌डे ।

1- शिव-बिवाह 2- भजन - कीर्तन : राम 3- राम-लीला- गान 4- भजन-कीर्तन - कृष्ण 5- माता-भक्ति : मूल रुप से माई के उपर बा बाकिर एह में अधिकतर काव्य भक्ति मय आ मुखड़ा देवी देवता के गोहरा के शुरु होता । 6- आरती : अलग अलग देवी देवता के आरती

भिखारी ठाकुर के मय नाटक में भक्ति भाव भरपूर भरल बा । जबकि भिखारी ठाकुर जातिगत भेद भाव , लैंगिक भेदभाव , सामाजिक विषमता , समाज के बेमारी आदि प खुल के लिखले बा‌डे । भिखारी ठाकुर प लिखाइल पहिला किताब में महेश्वराचार्य , भिखारी ठाकुर के भक्ति भाव आ आस्तिकता प कुछ अंजोर कइले बानी आ बड़ा नीमन विवेचनात्मक लेख भिखारी ठाकुर के गीतन के संगे देले बानी ।

भिखारी ठाकुर के लिखल रचना में भोजपुरिया क्षेत्र के हर रुप रंग आ स्वरुप भरल बा , आ जाहिर बा भक्ति भाव रही । भिखारी ठाकुर अपना हर नाटक के शुरुवात मंगलचारण से करत रहुअन , अइसे त भोज्पुरिया क्षेत्र में कवनो नया काम के शुरुवात में देवी -देवता के गोहरावे के परम्परा रहल बा जवन भिखारी ठाकुर के नाटकन में हरदम रहल बा । कोशिश कइल जाई कि भिखारी ठाकुर के रचना / नाटकन से ओह स्वरुप आ भाव के सोझा ले आवल जाउ । चुकि अजा के समय में भिखारी ठाकुर के एह पक्ष के बहुत कम भा एकदम चर्चा नइखे होत एह से जरुरी हो जाता एह पक्ष के देखावल ।

साभार : भिखारी ठाकुर रचनावली, जनकवि भिखारी , कुछ पत्र-पत्रिका , भिखारी ।

- नबीन कुमार



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आखर 

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