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दुसरा किताब : भोजपुरी भाषा और साहित्य [ दुसरा संस्करण -1984]

दुसरा किताब : भोजपुरी भाषा और साहित्य [ दुसरा संस्करण -1984]

पहिला संस्करण : 1954

भाषा : हिन्दी

लेखक : डा. उदय नारायण तिवारी

प्रकाशक : बिहार राष्ट्रभाषा परिषद , पटना

[ इ किताब , पटना स्थित राष्ट्रभाषा परिषद में मिल सकेले ]

हम एह किताब के बारे में फेसबुक प हम सैक‌ड़न हाली लिखले होखब आ आगहूँ लिखब काहें कि भोजपुरी भाषा आ साहित्य खातिर इ किताब माइल-स्टोन ह । भोजपुरी के बोली से भाषा माने खातिर जवन राहि हम धइनी ओह राहि प इहे किताब हमार अंगुरी ध के ले के चलल आ आज हम जवन भी कुछ भोजपुरी खातिर नीमन बाउर क रहल बानी , उ एहि किताब के वजह से क रहल बानी । जदि भोजपुरी में इ किताब ना रहित त शायद हम भोजपुरी में लिखत बानी उ संभव ना रहित ।

16 मार्च 1951 के , प्रयाग विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डा. उदय नारायण तिवारी जी के , बिहार राष्ट्र भाषा परिषद के पहिला साल के पहिला भाषण ह । तिवारी जी इ भाषण , 16 मार्च से 20 मार्च ले पटना कालेज के बी.ए. लेक्चर हाल में " भोजपुरी भाषा और साहित्य " प पांच दिन के भाषण देले रहनी जवन किताब के रुप में बिहार राष्ट्रभाषा परिषद के ओर छपल ।

एह किताब के जब रउवा सभ खोलब त एह में शुरुवात में भोजपुरी क्षेत्र के नक्सा मिली आ ओह के बाद तिवारी जी के लिखल ' दो शब्द ' मिली । एह किताब के भा भोजपुरी के कवनो किताब के पढे से पहिले तिवारी जी के दो शब्द जरुर पढी । इहे दो शब्द ह जवना के पढला के बाद हम व्याकरण के कवनो किताब , तीन दिन में पुरा पढले रहनी । असल में दो शब्द में तिवारी जी के ग्रियर्सन से विरोध , ग्रियर्सन के विरोध के वजह से शोध के प्रेरणा आ ग्रिय्र्सन से सहमति के इतिहास मिली । एह दो शब्द में एगो भोजपुरिया के अपना मातृभाषा खातिर संघर्ष आ प्रेरणा के बात जाने के मिली ।

भोजपुरी भाषा आ साहित्य में ढुके से पहिले इ किताब , भाषा आ साहित्य के इतिहास बता रहल बिआ । खास क के आर्यन लैन्ग्वेज प हजारन साल पहिले इ किताब ले के जा रहल बिआ । संसार के भाषा के वर्गीकरण , भारोपीय परिवार से ले के इ किताब , मागधी , मैथिली , मगही तक के बारे में बता रहल बिआ । हिन्दी भाषा के बारे में समुचित जानकारी देत इ किताब , भोजपुरी भाषा में पहुंचे के पहिले एगो बडहन जरुरी आ गहिराह जानकारी भाषा सब के उपर दे रहल बड़ुवे । एह पुरा जानकारी के शीर्षक भा अध्याय ह उपोद्घात ।

खण्ड अध्याय आ परिशिष्ट में बंटाइल भोजपुरी साहित्य के अलग अलग इतिहास , हिन्दी , मैथिली , मगही संगे तुलना के संगे संगे व्याकरण के हर पहलू प भोजपुरी भाषा के कसत , इ किताब रउवा के अइसना स्थिति में ले के जा रहल बिआ जहाँ चहुंपला के बाद रउवा दिमाग आ दिल में एह भाषा के प्रति जवन भावनात्मक लगाव बा उ भाषाई तर्क प नीमन से मजा के चमक जाता । जदि एह भाषा के बारे में इचिको नकारात्मकता बा त उ गते गते मिछकरे लागत बा आ अंत में ओह नकारात्मकता के जगहि प एह भाषा में अउरी जाने अउरी पढे के बेचैनी होखे लागत बा । इ किताब अपने आप में भोजपुरी बिआ , साहित्य बिआ , भोजपुरी आ ओकरा साहित्य के इतिहास बिआ । एह किताब से रउवा भोजपुरी भाषा के उत्पति से ले के वर्तमान तक के स्थिति साफ-साफ सोझ आ सहज शब्दन में पढे के मिल जाइ । इ किताब भोजपुरी भाषा आ साहित्य खातिर गीत ह , बाइबिल ह , कुरान ह ।

रुचिकर बात बा कि इहे किताब आगे आवे वाला समय में लगभग हर भोजपुरी व्याकरण आ साहित्य खातिर मानक बनत गइल बिआ रेफरेंश एहि किताब से दिआइल बा आ आजो दिआ रहल बा ।

हिन्दी के मशहूर आलोचक रामविलास शर्मा , एह किताब के कुछ व्याकरण वाला हिस्सा के काटे खातिर , आ भोजपुरी के बोली साबित करे खातिर आपन अंतिम समय ले खटा देहले बाकिर इ किताब अपना एक एक शब्द अक्षरशः सही आ कसौटी प खरा उतरे वाला सत्य बनत गइल ।

जदि रउवा भोजपुरी भाषा आ साहित्य में कुछउ कइल चाहत बानी त इ किताब रउवा लगे जरुर रहे के चाहीं । जदि रउवा नजर में भोजपुरी मात्र बोली लउकत बिआ त इ किताब रउवा आंख खातिर जरुरी चश्मा ह जवना के पहिरला के बाद रउवा भोजपुरी के असल रुप लउके लागी ।



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आखर 

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