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एगारहवा किताब : भोजपुरी साहित्य के संक्षिप्त रुपरेखा

लेखक : डा. तैयब हुसैन 'पीड़ित' प्रकाशन : शब्द संसार , महेंद्रू , पटना पहिला संस्करण : 2004 भाषा : भोजपुरी

मूल रुप से इ किताब नालंदा विश्वविद्यालय खातिर लिखाइल रहे , आ बाद में तनि फेर बदलाव के संगे इ किताब सोझा आइल। अबहीं ले जतना किताबिन के चर्चा भइल बा उ मय के मय भोजपुरी भाषा साहित्य के इतिहास व्याकरण आदि प चर्चा भइल बा । ओहि क्रम में एहू किताब में भोजपुरी के समय काल वर्गीकरण आ फेरु साहित्य के विधा के उद्भव काल के अलग अलग चर्चा कइल गइल बा । जदि भोजपुरी के साहित्य के बारे में मोटा-मोटी आइडिया चाहीं , जदि भोजपुरी साहित्य के विकास के यात्रा देखल चाहत बानी , आ बहुत बेसी समय नइखी लगावल चाहत त रउवा खातिर इ किताब बिआ ।

शुरुवात होता ' भोजपुरी साहित्य के इतिहास में काल-विभाजन के आधार ' जवना में लगभग ओहि लोगन द्वारा दिहल समयकाल के बात हो रहल बा । रास बिहारी पांडे , डा. कृष्णदेव उपाध्याय , उदय नारायण तिवारी , दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह , गणेश चौबे आदि के । एगो चीझु प सर्व-सम्मति बा कि रीति काल जइसन कवनो काल भोजपुरी में नइखे जवना ओर दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह ' नाथ ' जी इशारा कइले बानी ।

दुसरा अध्याय भोजपुरी काव्य के उद्भव आ विकास के बात क रहल बा । चौरासी सिद्धन , नाथ साहित्य से ले के वर्तमान तकले । दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह जी , डब्ल्यू जी आर्चर आ देवेंद्र सत्यार्थी तीनो लोगन के संकलन के बात हो रहल बा । भोजपुरी में संस्कार गीतन के पारम्परिक गीतन के श्रम गीतन के बात हो रहल बा । कबीर के भाषा भोजपुरी के चर्चा एह अध्ययाय में पढे के मिली संत साहित्य से कुछ उदाहरण देत इ अध्याय आधुनिक काल के कवि साहित्यकार लोगन के काव्य साहित्य के चर्चा क रहल बड़ुवे ।

अगिला अध्याय ह भोजपुरी कहानी के उद्भव आ विकास काल के बतकही जवना के शुरुवात कहानी का ह से हो रहल बा । भोजपुरी के लिपिबद्ध कहानी संग्रह ' जेहल के सनदि ' से चर्चा के शुरुवात एह किताब में हो रहल बा । फेरु आगे अलग अलग साहित्यकार लोगन के कहानी आ संग्र्ह के बात होत भोजपुरी में कहानी गद्य के विकास के बात हो रहल बा ।

तीसरा अध्याय में उपन्यास के उद्भव आ विकास के बात हो रहल बा । उपन्यास का ह कइसे लिखाला , कहानी से कइसे अलग ह के बतावत शुरुवात भोजपुरी के पहिला उपन्यास लिखे वाला ' बिंदिया ' के उपन्यासकार रामनाथ पांडे जी से उपन्यास साहित्य प बात हो रहल बा आ फेरु भोजपुरी में उपन्यास साहित्य के शिल्प विधान आ आगे के विकास के बारे में जानकारी एह अध्याय में बा । विषय आ वर्गीकरण मिल जाउ एह अध्याय में उपन्यासन के ।

चौथा अध्याय भोजपुरी भाषा में नाटकन के उद्भव आ विकास के बात क रहल बा । एह में नाटक के बुनियाद के बात हो रहल बा । भोजपुरी में लोकधर्मी नाटक के बात हो रहल बा । भोजपुरी के पहिला नाटक ' देवाक्षर चरित ' ( 1884 ) के बात हो रहल बा । इ नाटक नागरी लिपी के प्रचार खातिर बनल रहे एह बात के चर्चा करत भोजपुरी भाषा में नाटक आ एकांकी साहित्य के विकास प मय जानकारी देत इ अध्याय लोकधर्मी नाटकन से शिष्ट साहित्य नाटकन के बारे में बात क रहल बा ।

पांचवा अध्याय भोजपुरी में निम्बंध के उद्भव आ विकास के बात क रहल बा । निम्बंध का होला कइसे लिखाला आ फेरु भोजपुरी गद्य के एह विधा के विकास के बतकही । भोजपुरी में लिखाइल पहिला लिपीबद्ध निबंध से ले के चर्चा अलग अलग निबंध के शैली आ विकास यात्रा के बतकही एह अध्याय में ।

छठवा आ अंतिम अध्याय बात क रहल बा भाषा आ साहित्य के जरुरी विधा पत्र-पत्रिका के । कइसे भोजपुरी में सबसे पहिले एगो अध्यापक पत्रिका निकालल शुरु कइले रहले। पत्रिका के लिपी कैथी रहे आ भाषा भोजपुरी । हाँथ से लिख के उ पत्रिका खुदे बाटत रहले । बगसर के गांधी के भले आज भोजपुरी समाज भुला गइल होखे बाकिर 1915 में ' बगसर समाचार ' से भोजपुरी पत्रिका के श्रीवृद्धि शुरु भइल रहे । पत्रिका के विकास यात्रा के जानकारी एह अध्याय में बा ।

एगो जरुरी किताब , बहुत संछेप में भोजपुरी भाषा में साहित्य के विकास के जानकारी एह किताब में मिल जाइ । जदि एह किताब के चाहत बानी त भोजपुरी साहित्यांगन प जोहीं । ओहिजे इ किताब बिआ ।




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